फिर कोयला के ई-आक्शन पर सिंडिकेट की रंगदारी शुरू, डीओ धारक हटे पीछे

फिर कोयला के ई-आक्शन पर सिंडिकेट की रंगदारी शुरू, डीओ धारक हटे पीछे

आसनसोल । कभी अवैध खदान बनाकर तो कभी ईसीएल की खदानों से तो कभी ईसीएल के डिपो से कोयला चोरी होता था, फिर ईसीएल के कोयला लदे वाहनों को रास्ते में नकल कोयला से बदलकर कोयला तस्कर अपने धंधे को आगे बढ़ाने लग गए। इस बीच कोयला माफियाओं ने ईसीएल की विभिन्न कोलियरी से डीओ धारकों द्वारा ई-आक्शन से कोयला उठाने पर नजर लगा दी। हालांकि बीते कुछ समय से यह बंद था, लेकिन कहते है न शेर के मुंह मे खून लग जाये तो वो खून की तलाश में रहता है। उसी तरह इन कोयला माफियाओं को कोयले के कारोबार से अवैध रूप से वसूली जा रही बेतहाशा कमाई दिख गयी है, जिसे वे कभी नहीं बंद करना चाहते। इसलिए पहले की तरह फिर एक बार कोयला के ई-आक्शन पर सिंडिकेट की रंगदारी शुरू हो गई है। कोयला माफियाओं के इस यरह से फिर सामने आने के कारण ईसीएल में डीओ धारक अब कोयला लेने में रुचि नहीं दिखा रहे। इन्हीं कारणों की वजह से रानीगंज, जामुड़िया, पांडवेश्वर क्षेत्र में ऑक्शन का पूरा कोयला इस बार नहीं उठ पाया। पांडवेश्वर एरिया के मदारबनी कोलियरी में भी 1500 टन का ऑक्शन था, लेकिन यहां पर भी किसी डीओ धारक ने आवेदन नहीं किया। सोनपुर बाजारी एरिया में 40 हजार टन ऑक्शन में करीब 10 हजार टन काेयला बच गया। बंकोला एरिया के शंकरपुर इंक्लाइन में करीबन 7 हजार टन के ऑक्शन में आधे से भी अधिक कोयला बच गया। वहीं सोदपुर एरिया की बात करे, जहां सिंडिकेट पूरी तरह से सक्रिय नहीं है तो इस एरिया की पारबेलिया कोलियरी में 1000 टन कोयले के ऑक्शन में पूरा कोयला आक्शन हो गया। बताया जाता है कि सिंडिकेट की ओर से आक्शन से कोयला लेने वालों को सूचित किया गया था कि कोयला उठाने पर 1650 रुपये प्रतिटन रंगदारी देनी होगी, इन्हीं कारणों से कई एरिया में अधिकांश डीओ धारक पीछे हट गए। सूत्र बताते है कि कोयला माफियाओं के सिंडिकेट ने अब ईसीएल के उत्पादित कोयला पर नजर रखी है। मालूम हो कि पांडवेश्वर क्षेत्र में पिछले माह रंगदारी न देने पर एक डीओ धारक की पिटाई कोयला माफियाओं के गुर्गों ने कर दी थी, इसे लेकर थाना में मामला भी दर्ज किया गया था। लेकिन कार्रवाई क्या हुई, यह समझ से परे है। ऐसे में फिर एक बार कोयला माफिया अपने सिंडिकेट के माध्यम से रंगदारी लेने उतर गए है, जहां डीओ धारक साफ कहते है कि हम रंगदारी क्यों दे? वहीं रंगदारी न देने पर मारपीट होती है, इसलिए ई-ऑक्शन में कोई भूमिका न निभाते हुए वे कोयला उठाएंगे ही नहीं, ऐसे में ईसीएल स्वयं निर्णय ले कि क्या करना है।